cell-phone

मोबाइलनामा

मोबाइल के आने से, कई हो गए हैं पागलजीने का यही जरिया हो गया है आजकल। उंगलियाँ ही निभा रही हैं सभी रिश्तेजुबान को वक्त ही नहीं किसी के वास्ते। सब टच में बिजी हैं, मगर टच में कोई नहींक्या Read more

faramosh

फरामोश

काम हो जाने पर भूल जाना, ये दस्तूर है पुरानाफिर भी काम करते रहना, शायद मिलेगा कोई खजाना दो चीजे नहीं भूलती, चाहे कितना भी भुलाओएक होता है घाव , और दूसरा है लगाव जो भूलना चाहिए , वो रह Read more

Flower

नज़र का नज़रिया

नज़र अगर हो नेक, तो मिल जाता है साहिल, खुद में झाँको तो पता चलता है तुम ही हो सबसे क़ाबिल।। जो बात ज़ुबान न कह सकी, वो नज़रों ने कह डाली, ज़िंदगी में एक फूल के अक्सर होते हैं Read more

portal

पहचान

अपने ही अक्सर करते है, अपनोंका अपमान ।भुलादेके आगे बढना, ये रखो आपकी पहचान ॥ सुख दुख के समुंदर मे बहती है जीवन की नैय्या ।कश्ती वो डुबती नहीं, जिसे आशिर्वाद देनेवाली होती है मैय्या ॥ क्रोध, लोभ, मत्सर से Read more

safar

सफर

जीवन के सफर को जारी रखियेमरने की भी मगर तैयारी रखिये दिल से काम लीजे दिमाग़ से नहींसर को ना इतना भारी रखिये वक़्त आने पे मिल ही जायेगाइतनी भी ना बेकरारी रखिये बेवफ़ा है वो तो बेवफ़ा ही सहीआप Read more

sapna

सपना

रोज रोज नींद से जो जागते हैं हमसपना ग़र टूटे तो करते नहीं हैं ग़म फिर सपना देखते हैं जागते हुए हमउसके पीछे बेतहाशा भागते हैं हम सोते हुए से जागे पाया था कुछ नहींजागे हुए से जागेंगे पाएंगे कुछ Read more

naaw

नाख़ुदा

पक्का है जब भरोसा परवरदिगार मेंखुश इस दयार में खुश उस दयार में हम हैं राही प्यार के चलते हैं मस्ती मेंफूल बिछे रस्ते में या राह-ए-पुरखार मे जब अपनी कश्ती का नाख़ुदा ख़ुदा हैडरें क्यूँ भवसागर के भाटा में Read more

children playing

मनमर्जी

होता है जो वो ग़र तेरी मर्जी हैये बुराई अच्छाई सब फर्जी है नकली है प्यार नफ़रत बेमानीपरोपकार झूठा झूठी खुदगर्जी है मढ़ के नेकी बदी उस के नामक्या हम सब करते मनमर्जी हैं? © सुनील चौहान

mystery

रुपिया के माला

रुपिया के माला फेरल जाताधराई ना लेकिन घेरल जाता जे भरमल माया के जंजाल मेंओके ऊख जइसन पेरल जाता जे अँखिये के सोझवा खाड़ा बाओके दुनिया भर में हेरल जाता ख़ुशी के त अकाल बा लेकिनमुँह पर मुस्कान लभेरल जाता Read more

couple

अद्वैत प्रेम

काश! समझ लेता हर कोई, यहाँमोहब्बत, दर्द के सिवा कुछ भी नहींदर्द के खारा जल को भी पीना पड़ताखुद को खोने के सिवा, कुछ भी नहीं उस रास्ते पर चलने को मुड़ते हैं कदमजहाँ शूलों के सिवा और कुछ भी Read more